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🚩🌞 *सुप्रभातम* 🌞
📜««« *आज का पञ्चांग* »»»📜
कलियुगाब्द.........................5123
विक्रम संवत्........................2078
शक संवत्..........................1943
मास.................................श्रावण
पक्ष...................................शुक्ल
तिथी................................पूर्णिमा
संध्या 05.35 पर्यंत पश्चात प्रतिपदा
रवि.............................दक्षिणायन
सूर्योदय...........प्रातः 06.06.12 पर
सूर्यास्त...........संध्या 06.53.27 पर
सूर्य राशि.............................सिंह
चन्द्र राशि............................मकर
गुरु राशि.............................कुम्भ
नक्षत्र...............................धनिष्ठा
संध्या 07.34 पर्यंत पश्चात शतभिषा
योग.................................शोभन
प्रातः 10.33 पर्यत पश्चात अतिगंड
करण.................................विष्टि
प्रातः 06.13 पर्यंत पश्चात बव
ऋतु....................................वर्षा
*दिन.............................रविवार*
*🇮🇳 राष्ट्रीय सौर श्रावण, दिनांक ३१*
*( नभ मास ) !*
*🇬🇧 आंग्ल मतानुसार दिनांक*
*२२ अगस्त सन २०२१ ईस्वी !*
⚜️ *तिथि विशेष -*
*श्रावण शुक्ल पूर्णिमा :-*
*श्रावणी -*
श्रावणी पर्व से वेदाध्ययन का सीधा संबंध है। स्वाध्याय जीवन का अंग होना चाहिए। स्वाध्याय आर्यों के जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है। वेद का पढ़ना-पढ़ाना, सुनना-सुनाना आर्यों का परम धर्म है।
शतपक्षब्राह्मण में स्वाध्याय की प्रशंसा करते हुए लिखा गया है कि स्वाध्याय करने वाला सुख की नींद सोता है, युक्तमना होता है, अपना परम चिकित्सक होता है, उसमें इंन्द्रियों का संयम और एकाग्रता आती है और प्रज्ञा की अभिवृद्धि होती है। कहा गया है कि स्वाध्याय न करनेवाला अब्राह्मण हो जाता है। अतः प्रतिदिन स्वाध्याय करना चाहिए।
श्रद्धालु उनके पास आकर वेदाध्ययन और उपदेशों में अपना समय लगाते थे और ऋषिजनों की सेवा करते थे। इसलिए यह समय ऋषि तर्पण भी कहलाता है। यह वेदाध्ययन, श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को आरंभ किया जाता था, अतः इसे *श्रावणी उपाकर्म* कहा जाता है।
पारस्करगृह्यसूत्र में लिखा है-
*'अथातोऽध्यायोपाकर्म।, ओषधीनां प्रादुर्भावे वणेन श्रावण्यां पौर्णमास्याम्।'*
मनुस्मृति में उपाकर्म और उत्सर्जन का आदेश दिया गया है-
*श्रावण्यां प्रौष्ठपद्यां वाऽप्युपाकृत्य यथाविधि।*
*युक्तश्छन्दांस्यधीयीत मासान् विप्रोऽर्धपचंमान्।*
*पुष्ये तु छन्दसां कुर्याद्बहिरुत्सर्जनं द्विजः।*
*माघशुक्लस्य वा प्राप्ते पूर्वाह्वे प्रथमेऽहनि।*
अर्थात् श्रावणी या भाद्रपदी पूर्णिमा को उपाकर्म करके साढ़े चार मास में ध्यानपूर्वक वेदाध्ययन करें। पुष्य नक्षत्रवाली पूर्णिमा में वेद का उत्सर्जन नामक कर्म ग्राम के बाहर जाकर करें या माघ शुक्ल के प्रथम दिन के पूर्वाह्व में करें।
चिरकाल के पश्चात वेद के पठन-पाठन का प्रचार न्यून हो जाने पर साढ़े चार मास तक नित्य वेदपारायण की परिपाटी गई और लोग प्राचीन उपाकर्म और उत्सर्जन के स्मारकरूप में श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को एक ही दिन उपाकर्म तथा उत्सर्जन की विधियों को पूरा करने लगे।
काल के प्रभाव से इस पर्व पर वेद स्वाध्यायात्मक ऋषि तर्पण का लोप-सा हो गया। होमयज्ञ का प्रचार भी उठ गया।
आजकल श्रावणी कर्म का स्वरूप यह है कि धार्मिक आस्थावान् यज्ञोपवीतधारी द्विज श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को गंगा आदि नदी अथवा किसी पवित्र सरोवर तालाब या जलाशय पर जाकर सामूहिक रूप से पंचगव्य प्राशनकर प्रायश्चित संकल्प करके मंत्रों द्वारा दशविध स्नान कर शुद्ध हो जाते हैं।
तदनन्तर समीप के किसी देवालय आदि पवित्र स्थल पर आकर अरुन्धीसहित सप्तर्षियों का पूजन, सूर्योपस्थान, ऋथ्षतर्पण आदि कृत्य संपन्न करते हैं। तदुपरांत नवीन यज्ञोपवीत का पूजन, पितरों तथा गुरुजनों को यज्ञोपवीत दान कर स्वयं नवीन यज्ञोपवीत धारण करते हैं।
*रक्षाबंधन -*
सनातन परंपरा में किसी भी कर्मकांड व अनुष्ठान की पूर्णाहुति बिना रक्षासूत्र बांधे पूरी नहीं होती। प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर लड़कियां और महिलाएं पूजा की थाली सजाती हैं।
थाली में राखी के साथ रोली या हल्दी, चावल, दीपक व मिष्ठान्न आदि होते हैं। पहले अभीष्ट देवता और कुल देवता की पूजा की जाती है, इसके बाद रोली या हल्दी से भाई का टीका करके उसकी आरती उतारी जाती है व दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है।
भाई, बहन को उपहार अथवा शुभकामना प्रतीक कुछ न कुछ भेंट अवश्य देते हैं और उनकी रक्षा की प्रतिज्ञा लेते हैं। यह एक ऐसा पावन पर्व है, जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को पूरा आदर और सम्मान देता है। रक्षाबंधन के अनुष्ठान के पूरा होने तक व्रत रखने की भी परंपरा है।
यह रक्षाबंधन का अभीष्ट मंत्र है :-
*'येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबल |*
*तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल' ||*
अर्थात जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षाबंधन से मैं तुम्हें बांधता हूं, जो तुम्हारी रक्षा करेगा।
☸ शुभ अंक...........................4
🔯 शुभ रंग.........................लाल
⚜️ *अभिजीत मुहूर्त :-*
दोप 12.04 से 12.54 तक ।
👁🗨 *राहुकाल :-*
संध्या 05.14 से 06.49 तक ।
🌞 *उदय लग्न मुहूर्त :-*
*सिंह*
05:33:44 07:51:26
*कन्या*
07:51:26 10:08:06
*तुला*
10:08:06 12:27:59
*वृश्चिक*
12:27:59 14:46:56
*धनु*
14:46:56 16:51:17
*मकर*
16:51:17 18:33:52
*कुम्भ*
18:33:52 20:01:34
*मीन*
20:01:34 21:26:45
*मेष*
21:26:45 23:02:14
*वृषभ*
23:02:14 24:58:05
*मिथुन*
24:58:05 27:13:03
*कर्क*
27:13:03 29:33:44
🚦 *दिशाशूल :-*
पश्चिमदिशा - यदि आवश्यक हो तो दलिया, घी या पान का सेवनकर यात्रा प्रारंभ करें ।
✡ *चौघडिया :-*
प्रात: 07.43 से 09.18 तक चंचल
प्रात: 09.18 से 10.53 तक लाभ
प्रात: 10.53 से 12.28 तक अमृत
दोप. 02.03 से 03.38 तक शुभ
सायं 06.48 से 08.13 तक शुभ
संध्या 08.13 से 09.38 तक अमृत
रात्रि 09.38 से 11.03 तक चंचल ।
📿 *आज का मंत्रः*
॥ ॐ महारुपाय नम:॥
*संस्कृत सुभाषितानि :-*
कालः समाविषमकरः परिभवसंमानकारकः कालः ।
बालः करोति पुरुषं दातारं या चितारं च ॥
अर्थात :-
काल सम और विषम करनेवाला, अपमान और सन्मान करनेवाला है; काल हि मनुष्य को दातार और भिक्षुक बनाता है ।
🍃 *आरोग्यं सलाह :-*
*सांस फूलने के घरेलू उपाय -*
*4. कॉफी का सेवन -*
यदि आपको अस्थमा का अटैक आया है तब ऐसे में आपको तुरंत हो कॉफी का सेवन करना चाहिए। इससे श्वास नलियों में रुकी हुई हवा तुरंत हो खुल जाती है। यदि आप कॉफी का सेवन नहीं कर सकते तो आपको कॉफी की महक सूघने से भी फायदा प्राप्त हो जायेगा।
. ⚜ *आज का राशिफल* ⚜
🐐 *राशि फलादेश मेष :-*
*(चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ)*
प्रसन्नता रहेगी। जोखिम न लें। लाभ होगा। कार्यपद्धति में विश्वसनीयता बनाएं रखें। आर्थिक अनुकूलता रहेगी। रुका धन मिलने से धन संग्रह होगा। पुराने मित्र व संबंधी मिलेंगे। अच्छी खबर मिलेगी। राज्यपक्ष से लाभ के योग हैं। नई योजनाओं की शुरुआत होगी।
🐂 *राशि फलादेश वृष :-*
*(ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)*
आय बढ़ेगी। मनोरंजक यात्रा होगी। प्रसन्नता रहेगी। सहयोगी मदद नहीं करेंगे। व्ययों में कटौती करने का प्रयास करें। परिवार में प्रसन्नता का वातावरण रहेगा। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। कार्य पूर्ण होंगे। व्यापार के कार्य से बाहर जाना पड़ सकता है।
👫🏻 *राशि फलादेश मिथुन :-*
*(का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)*
मेहनत अधिक होगी। आवास संबंधी समस्या हल होगी। आलस्य न करें। सोचे काम समय पर नहीं हो पाएंगे। व्यावसायिक चिंता रहेगी। संतान के व्यवहार से कष्ट होगा। शोक समाचार मिल सकता है। काम में मन नहीं लगेगा। विवाद से बचें।
🦀 *राशि फलादेश कर्क :-*
*(ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)*
प्रसन्नता रहेगी। धनार्जन होगा। रोजगार में उन्नति एवं लाभ की संभावना है। लाभदायक समाचार मिलेंगे। प्रेम-संबंधों में सफलता मिलेगी। पार्टी व पिकनिक का आनंद मिलेगा। बौद्धिक कार्य सफल रहेंगे। सामाजिक एवं राजकीय ख्याति में अभिवृद्धि होगी। व्यापार अच्छा चलेगा।
🦁 *राशि फलादेश सिंह :-*
*(मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)*
प्रसन्नता बनी रहेगी। व्यापार में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। संपत्ति के बड़े सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। कार्य के विस्तार की योजनाएं बनेंगी। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न करें। पठन-पाठन में रुचि बढ़ेगी।
🙎🏻♀️ *राशि फलादेश कन्या :-*
*(ढो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)*
व्यवसाय ठीक चलेगा। लाभ होगा। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। कार्यों में विलंब से चिंता होगी। मानसिक उद्विग्नता रहेगी। पारिवारिक जीवन संतोषप्रद रहेगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है।
⚖ *राशि फलादेश तुला :-*
*(रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)*
दूसरों पर विश्वास हानि देगा। कार्य में बाधा होगी। पत्नी से आश्वासन मिलेगा। स्वयं के निर्णय लाभप्रद रहेंगे। मानसिक संतोष, प्रसन्नता रहेगी। नए विचार, योजना पर चर्चा होगी। दूसरों की नकल न करें। चोट व रोग से बचें। जल्दबाजी से हानि होगी।
🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक :-*
*(तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)*
निवेश शुभ रहेगा। बाहरी सहायता से काम होंगे। ईश्वर में रुचि बढ़ेगी। कामकाज की अनुकूलता रहेगी। व्यावसायिक श्रेष्ठता का लाभ मिलेगा। रोमांस में सफलता मिलेगी, आपसी संबंधों को महत्व दें। पूंजी संचय की बात बनेगी। तंत्र-मंत्र में रुचि बढ़ेगी। यात्रा मनोरंजक रहेगी।
🏹 *राशि फलादेश धनु :-*
*(ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे)*
निवेश शुभ रहेगा। बाहरी सहायता से काम होंगे। ईश्वर में रुचि बढ़ेगी। कामकाज की अनुकूलता रहेगी। व्यावसायिक श्रेष्ठता का लाभ मिलेगा। रोमांस में सफलता मिलेगी, आपसी संबंधों को महत्व दें। पूंजी संचय की बात बनेगी। तंत्र-मंत्र में रुचि बढ़ेगी। यात्रा मनोरंजक रहेगी।
🐊 *राशि फलादेश मकर :-*
*(भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी)*
व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। रोमांस में सफलता मिलेगी, प्रसन्नता रहेगी। रुका हुआ धन मिल सकता है। निवेश शुभ रहेगा। स्वयं के ही प्रयासों से जनप्रियता एवं मान-सम्मान मिलेगा। रुका काम समय पर पूरा होने से आत्मविश्वास बढ़ेगा। व्यवसाय लाभप्रद रहेगा, नई योजनाएं बनेंगी।
🏺 *राशि फलादेश कुंभ :-*
*(गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)*
अपनी वस्तुएं संभालकर रखें। जोखिम न लें। नए संबंधों के प्रति सतर्क रहें। भूल करने से विरोधी बढ़ेंगे। कार्यक्षेत्र का विकास एवं विस्तार होगा। उपहार मिल सकता है। संतान की चिंता दूर होगी। अप्रत्याशित खर्च होंगे। तनाव रहेगा। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें।
🐋 *राशि फलादेश मीन :-*
*(दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)*
वरिष्ठ जन सहायता करेंगे। अप्रत्याशित लाभ होगा। यात्रा होगी। व्यावसायिक अथवा निजी काम से सुखद यात्रा हो सकती है। पठन-पाठन में रुचि बढ़ेगी। दूसरों से न उलझें। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे।
*🚩🎪‼️ 🕉️ घृणि सूर्याय नमः ‼️🎪🚩*
*☯ आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो ☯*
*‼️ शुभम भवतु ‼️*
🚩 🇮🇳 ‼️ *भारत माता की जय* ‼️ 🇮🇳 🚩🚩
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