Saturday, 12 July 2014

मेरा जीवन जी कर देख

'' मेरा जीवन जी कर देख ''

मिट्टी मिट्टी न लगे,
पानी से प्यास न बुझे,
सागर की गेहराई जैसी हों कठिनाइयाँ,
हर पल जीना दुश्वार लगे....

चलते रहे दिनभर पर राह न मिले,
हर कोशिश रहे नाकाम कोई काम न चले,
कैसा भी करु काम हर काम में रोङे हों,
जब की गधों वाले काम में मुझ जैसे घोङे हों....
तब भी जी सकता हूं हिम्मत तो देख,
मेरा जीवन देख जज्बात देख,
कभी भी कमी नहीं पाता हूँ फिर भी,
तू जितना चाहे सितम करके देख....

एक माँ है एक बाप है,
उनका छोटा सा जीवन मेरे साथ है,
चुरा लूँगा हर लम्हा तुझसे उनके नाम का,
यह बता में कब कहूँगा तू हे मेरे काम का,
मुझे पता है एक दिन ऐसा आएगा,
जब तू जीवन के सारे सुख कराएगा....

इंतजार में हूँ उस हर लम्हे के,
जब तू मेरा माँ पापा सबका साथ निभाएगा,
खूब रुलाया तूने कब एक और जीवन का अनुभव कराएगा,
हे जीवन रचने वाले '' मेरा जीवन जी कर देख '' बङा मजा आएगा।।

लेखक :- सक्षम

©Saksham 2014

No comments:

Post a Comment